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Thursday, 5 January 2012

रस्म-ए-उल्फत निभाएं भी तो कैसे

रस्म-ए-उल्फत निभाएं भी तो कैसे,
तेरी चाहत के लायक नजर आए भी तो कैसे,

तेरे पास है एक शीशे सा दिल, मैं रास्ते का पत्थर हूं,
तू दरिया है मुहब्बत का, मैं जलता हुआ अंगारा हूं।
तेरा प्यार से सज़दे के काबिल मैं मयकदों की रानी हूं,
तू आफताब, मैं जर्रा हूं, तू तरूवर मैं तेरी छाया हूं।

तेरे लिए तो मैं ना बनी, तू खुदा की नेयमत है,
मेरे लिए तू क्यूं है परेशान, मैं चरण रज तेरे पैरों की।
ये दुनिया है पाषाण ह्रदय, तू क्यों आस लगाता है,
मेरे लिए तू गम न कर, तुझे कसम उस दाता की।

मैं जलती हुई चिता हूं, खाक में मिल जाऊंगी,
तू आसमां में चमकेगा, मैं तुझे देख मुस्कुराऊंगी।।


Sunday, 4 December 2011

'क्यूं कर गुजर रहे हैं मेरी जिंदगी के दिन, तेरे बिन'

क्यूं कर गुजर रहे हैं मेरी जिंदगी के दिन, तेरे बिन.
तू रु-ब-रु हो तो तुझे बताऊं।
क्यूं आह दिल में दबी-दबी, ये मुश्किलों के दिन,
तू समझ सके तो तुझे समझाऊं।।

वो तेरा आना जिंदगी की रोशनी थी,
वो तेरा जाना तन्हाईयों का आगाज था।
तेरे बिन कटता नही एक पल मेरा,
तेरे बिना सजता नहीं यौवन मेरा।।

तू आ जा कि ये दिल बे-करार है,
तू आ जा कि दिल को नहीं करार है।
क्यूं सांस है घुटी-घुटी मेरी, हसरतों के बिन,
तू पास आए तो तुझे सुनाऊं।।

क्यूं मयकदों के जाम है खाली, तेरी मयकशीं के बिन,
तू कोशिश तो कर, हाल-ए-दिल तुझे कैसे मैं समझाऊं।।

Friday, 2 December 2011

क्यूं जलता है दिल, क्यूं आंख है नम

क्यूं जलता है दिल, क्यूं आंख है नम,
क्यूं शिकवे है कई और वक्त है कम।
इस दबी हुई चिंगारी को हवा न दो,
इस राख के ढ़ेर पर महल अपना खड़ा न करो।।

जल जाएगा आशियाना तेरा, तू समझता ही नहीं,
गिर जाएगा महल तेरा, ये तुझे पता ही नहीं।
कहां लेकर जाएं इस नामुराद दिल को
हसरते हैं कई मगर कोई समझता ही नहीं।।

सूख गई नदी इन आंखों की,
अब किसी का प्यार इन पर बरसता ही नहीं।
उम्मीदे हैं कई, तमन्नाएं हैं कई,
मगर इनको पूरी करने की राह कोई दिखती ही नहीं।।

दफन हो जाएगी कब्र में ये नामुराद हसरतें मेरी,
क्योंकि कब्र से उठकर सपने कभी पूरे होते नहीं।।

Thursday, 1 December 2011

दिल की तन्हाईयों का आलम न पूछ मेरे दोस्त

दिल की तन्हाईयों का आलम न पूछ मेरे दोस्त
एक अरसा हो गया मुस्कुराए हुए।
कभी दर्दे दिल ने इसे बेजार किया तो,
कभी बेदर्द दुनिया ने इसे तार-तार किया।
तू तो सब जानता है मेरे दोस्त,
हम तो हैं बस दिल को बहलाए हुए।।

कभी सपनों को छिना, तो कभी कांटे हैं बिछाए,
लोगों ने न जाने, कैसे-कैसे जख्म दिल पे हैं लगाएं।
फिर भी तू कहता है मेरे दोस्त, तू क्यों है अपने जज्बातों को दबाए हुए,
एक तेरा प्यार था मेरे जीने का मकसद,
एक तेरा साथ था दुनिया की हसरत।
न जाने उस पर भी मेरे दोस्त,
पहरे लगा दिए जमाने ने मेरे लिए।।