Sunday, 1 January 2012

उदास रात है, उमड़ रहा है जज्बातों का सैलाब

उदास रात है, उमड़ रहा है जज्बातों का सैलाब,
हो कहां तुम? दिल कर रहा है इंतजार।
सो गए थे भाव सारे, कर दिया जागृत तूने,
भर दिया प्यार से, मन के हर कोने को।

लीन हूं मैं स्वप्न में हर क्षण, जागते अहर्निश,
चाहती हूं जीत लेना, सारे युद्ध जीवन के।

नहीं है तू मेरा ज्ञात है मुझे,
पर करती हूं समर्पण तुझ पर,
लिए मन में एक विश्वास तुझे पाने का,
लिए यही आस, मैं प्रतीक्षारत रहूंगी, अनंत तक।

Saturday, 31 December 2011

एक लड़की हवा के संग-संग झूमती

एक लड़की हवा के संग-संग झूमती,
लहरों पर डोलती वो,
तितलियों के पीछे-पीछे भागती,
फूलों के संग खेलती वो,
बंदिशों को तोड़ती वो।

सोचती थी उड़ा करेगी, नीले खुले आसमान में,
चाहती थी समेट ले सारी खुशियां वो जहान की,
हर तरफ बिखेरती रंग अपने प्यार के वो,
छेड़ती गीत अनुराग के, जिंदगी के हर साज पे वो,
भोली सी वो, नाजुक सी, दुनिया के चालों से बेखबर,
हर शै में रंग भर देने की सोचती वो।

आंख खुली और टूटा सपना,
समझ आ गई जिंदगी,
खुशियों को नोचते ये पशु, इंसानों के वेश में,
दे जाते हैं दर्द दिल को, बन कर हमदर्द तेरे,
छिन लेते हैं चैन दिल का, प्रेम भरी बातों से,
सिसकियां उसकी रह गई, गह्वर में घुट के।

कौन जाने किस गली में खो गई कामनाएं उसके प्यार की,
आज ना वो रंग है, ना वो उमंग है,
बस जीवित रहने के लिए जीवन से हो रही एक जंग है।

Friday, 30 December 2011

'कल रात ख्वाब में देखा तुझे अपने पास'

कल रात ख्वाब में देखा तुझे अपने पास,
माथे पर स्पर्श तेरे अधरों का,
कांधों को थामे तेरी बाहें,
जगाती हैं अहसास तेरा,
मेरे अंदर विचित्र सा,
तेरे साथ का, तेरे भरोसे का।

ऐसा लगता है, तू औऱ मैं,
जैसे माला में गुहे गए मोतियों की तरह,
बंध गए एक धागे में, एक बंधन में।

क्या कहूं तुझसे? कैसे कहूं?
जी करता है, दिल का एक-एक जख्म दिखाऊं तुझे,
पर नहीं चाहती इस अभिसार बेला में, कोई अवसाद का क्षण,
नहीं खोना चाहती इन मधुर रसिक पलों को,
पाकर तुझे विश्वास नहीं होता अपनी नियति पर,
निःशब्द सी रह जाती हूं,
 एक अंजाना भय, तुझे खोने का डर
घेर लेता है भूरे बादलों की तरह।

"तेरी जुदाई का तसव्वर भी भला कैसे करूं,
हाथों की लकीरों में पाया है तुझे"
गूंज उठता है किसी शायर का कलाम मेरे मन में,
तू मेरा मान है, अभिमान है,
मेरी सांस की हर आगम का कारण है,
मेरे ह्रदय के हर स्पंदन में स्पंदित,
मन के हर कोने में पूजित,
कैसे जा सकते हो मुझसे दूर कभी,
मेरे प्रियवर! 

Sunday, 18 December 2011

आया एक दिन तू मन के द्वार

चेहरे पर लिए स्निग्ध मुस्कान,
आंखों में निश्चल प्यार।
आया एक दिन तू, मन के द्वार,
खुशियां समेटे अपने दामन में,
संताप हरण को।।

आंखे कितनी निष्पाप, भाव मृदु
छू गया मुझे तेरा स्पर्श।
लगा अबोध शिशु,

हुआ प्रकट, अंतस के अंधकार हरण को,
तुझे बोध नहीं है, मेरे अंतर में फैले अंधियारे का,
धूमिल न होने देना, कर रही थी प्रतीक्षा।
एक उजास की, सदियों से।।

यही एक अभिलाषा है।

कुछ बात है तुझ में, जो मुझको तेरी ओर लेकर आती है,
तू पर्वत सा शीश उठाए है, मैं सरिता सी बहती रहती हूं।
तेरे चेहरे का वो प्रखर तेज, मेरे दग्ध ह्रदय में आभाषित है,
तेरी वाणी का वो मधुर स्वर, मेरे रोम-रोम में झंकृत है।।

कमल नयन सी आंखे तेरी, मन में राग जगाती है,
नीलकंठ सी ग्रीवा तेरी, सुप्त कामनाएं जगाती है।
तू राग है, मैं तेरी रागिनी, तू चांद है, मैं तेरी चांदनी,
तू उज्जवल, धवल, भोर की बेला,
मैं तपती दोपहरी की धूप हूं।।

तेरे आ जाने से जीवन सर्दी सी मीठी धूप बना,
तेरे छूने से तन-मन में जागी एक हूक सी है।
तू सावन की पहली बौछारे,
मैं बारिश की उफनती धारा हूं।।

तू अनन्त आकाश, और मैं एक नन्हा सा तारा हूं,
किया है मैने तुझ-को, खुद-को अर्पण।
तू ही जीने का सहारा है,
साथ तेरा यूं बना रहे जीवन भर,
यही एक अभिलाषा है।।

Sunday, 11 December 2011

'जूस्तजू दिल की रह जाती है घुट कर दिल ही में'

किश्तों की है जिंदगी हमारी, किश्तों सी है खुशियां,
किश्तों में है बंट गई, छोटी सी ये दुनिया।
जूस्तजू दिल की रह जाती है घुट कर दिल ही में,
नग्में जीवन के गाता नहीं, कोई भरी महफिल में।।

क्यूं रोता है तू सपनों के टूट जाने पर,
आ हंस ले जरा, छोटी-छोटी खुशियों के मिल जाने पर।
कभी तो सुबह आएगी, घोर निशा के बाद,
कभी तो तारे चमकेंगे, बादल के छंट जाने के बाद।।

जी तू इस कदर, जैसे लहरें हो सागर में,
खुशियों को भर ले तू, इन आंखों के गागर में।
आ चलें कुछ दूर तलक,  जिंदगी के रंग बिखरे हो जहां,
जहां कहते ना धूप रहती, ना छाया ही वहां,
दामन में समेटे सौगातें, बांटे खुशी, जी ले पूरी जिंदगी।।

Friday, 9 December 2011

'तब तुम याद आते हो'

जब मस्त पवन के झोंके, पत्तों से टकराते हैं,
जब शाख से टूटे गुन्चे, मेरे दामन में गिर जाते हैं,
मुझे तुम याद आते हो।

तेरे बाहों की वो गरमी, तेरे प्यार की वो नरमी,
तेरा चुपके से कुछ कहना, मेरा हौले से शरमाना,
जब सुरमई आंखों में ख्वाब कई सजते हैं,
जब ओस की बूंदे फूलों को छूती है,
मुझे तुम याद आते हो।

वो गोधूली की बेला में, डूबते सूरज को निहारना,
वो चांदनी रातों में एकटक तारों का निरखना,
जब सर्द हवा के झोंके, बदन में राग जगाते हैं,
जब बारिश की बूंदे, मेरे तन-मन को भिंगाते हैं,
मुझे तुम याद आते हो।।